Sunday, December 28, 2014

2nd Chapter5th Sloka

गुरूनहत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके।
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान् ॥२.५॥

gurūnahatvā hi mahānubhāvān śreyo bhoktuṃ bhaikṣyamapīha loke|
hatvārthakāmāṃstu gurūnihaiva bhuñjīya bhogān rudhirapradigdhān ||2.5||

गुरून् 2/3 अहत्वा 0 हि 0 महानुभावान् 2/3 श्रेयः 1/1 भोक्तुम् 0 भैक्ष्यम् 2/1 अपि 0 इह 0 लोके 7/1
हत्वा 0 अर्थकामान् 2/3 तु 0 गुरून् 2/3 इह 0 एव 0 भुञ्जीय I/1 भोगान् 2/3 रुधिरप्रदिग्धान् 2/3 ॥२.५॥

·         गुरून् [gurūn] = teachers = गुरु (m.) + कर्मणि to अहत्वा 2/3  
·         अहत्वा [ahatvā] = not having killed = अव्ययम्
o   हन् to kill, injure + क्त्वा
o   न हत्वा इति अहत्वा । नञ्तत्पुरुषसामासः
·         हि [hi] = indeed= अव्ययम्
·         महानुभावान् [mahānubhāvān] = highly exalted = महानुभाव (m.) + adj. to गुरून् 2/3
o   महान्तः (great) अनुभावाः (dignitiy) इति महानुभावाः । कर्मधारयतत्पुरुषसमासः
·         श्रेयः [śreyaḥ] = better =  श्रेयस् (n.) + 1/1
o   प्रशस्य (exellent) + ईयसुँन् (comparative)
= श्र + ईयस्
= श्रेयस् (better)
·         भोक्तुम् [bhoktum] = to eat = अव्ययम्
o   भुज् (7U) to eat, enjoy + तुमुँन् (to infinitive)
o   भुज् + तुम्          3.3.10 तुमुन्ण्वुलौ क्रियायां क्रियार्थायाम् । ~ प्रत्ययः परश्च धातोः
= भोज् + तुम्      8.2.30 पुगन्तलघूपधस्य च । ~ गुणः अङ्गस्य इकः सार्वधातुकार्धधातुकयोः
= भोग् + तुम्      8.2.30 चोः कुः । ~ झलि
= भोक् + तुम्      8.4.55 खरि च । ~ झलां चर्
·         भैक्ष्यम् [bhaikṣyam] = food collected from others = भैक्ष्य (n.) + कर्मणि to भोक्तुम् 2/1
·         अपि [api] = even= अव्ययम्
·         इह [iha] = here= अव्ययम्
o   इदम् (this) + ह (7th case)         5.3.11 इदमो हः । ~  सप्तम्याः
= इ + ह                                               5.3.3 इदम इश् ।
= इह
·         लोके [loke] = in this world = लोक (m.) + अधिकरणे 7/1
·         हत्वा [hatvā] = having killed = अव्ययम्
o   हन् to kill, injure + क्त्वा
·         अर्थकामान् [arthakāmān] = security and pleasure = अर्थकाम (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3
·         तु [tu] = wheras= अव्ययम्
·         गुरून् [gurūn] = teachers = गुरु (m.) + कर्मणि to हत्वा 2/3
·         इह [iha] = here= अव्ययम्
·         एव [eva] = indeed= अव्ययम्
·         भुञ्जीय [bhuñjīya] = I would experience = भुज् (7U) to enjoy + विधिलिङ्/कर्तरि/I/1
·         भोगान् [bhogān] = enjoyments = भोग (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3
·         रुधिरप्रदिग्धान् [rudhirapradigdhān] = stained by blood = रुधिरप्रदिग्धान् (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3


Sentence 1:
महानुभावान् 2/3 गुरून् 2/3 अहत्वा 0 हि 0  
इह 0 लोके 7/1 भैक्ष्यम् 2/1 अपि 0 भोक्तुम् 0 श्रेयः 1/1 [स्यात् III/1]
It would be ([स्यात् III/1]) better (श्रेयः 1/1) to eat (भोक्तुम् 0) even (अपि 0) the food collected from others (भैक्ष्यम् 2/1) here (इह 0) in this world (लोके 7/1) after not killing (अहत्वा 0) highly exalted (महानुभावान् 2/3) teachers (गुरून् 2/3).

Sentence 2:
गुरून् 2/3 हत्वा 0
इह 0 एव 0 रुधिरप्रदिग्धान् 2/3 अर्थकामान् 2/3 भोगान् 2/3 भुञ्जीय I/1 ॥२.५॥

Having killed (हत्वा 0) the teachers (गुरून् 2/3), I would experience (भुञ्जीय I/1) enjoyments (भोगान् 2/3), which are securites and pleasures (अर्थकामान् 2/3), and which are stained with blood (रुधिरप्रदिग्धान् 2/3). 

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