Tuesday, December 30, 2014

2nd Chapter 8th Sloka

न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद् यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् ।
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥२.८॥

na hi prapaśyāmi mamāpanudyād yacchokamucchoṣaṇamindriyāṇām |
avāpya bhūmāvasapatnamṛddhaṃ rājyaṃ surāṇāmapi cādhipatyam ||2.8||

0 हि 0 [तत् 2/1] प्रपश्यामि I/1 मम 6/1 अपनुद्यात् III/1 यत् 1/1 शोकम् 2/1 उच्छोषणम् 2/1 इन्द्रियाणाम् 6/3
अवाप्य 0 भूमौ 7/1 असपत्नम् 2/1 ऋद्धम् 2/1 राज्यम् 2/1 सुराणाम् 6/3 अपि 0 0 आधिपत्यम् 2/1 ॥२.८॥

·         [na] = not = अव्ययम्
·         हि [hi] = indeed = अव्ययम्
·         प्रपश्यामि [prapaśyāmi] = I see = प्र + दृश् (1P) to see + लट्/कर्तरि/I/1
·         मम [mama] = my = अस्मद् (pron. m.) + सम्बन्धे to इन्द्रियाणाम् 6/1    
·         अपनुद्यात् [apanudyāt] = would remove = अप + नुद् (6P) to remove + विधिलिङ्/कर्तरि/III/1
·         यत्  [yat] = this = यद्  (pron. n.) + कर्तरि to अपनुद्यात् 1/1     
·         शोकम् [śokam] = sorrow = शोक (m.) + कर्मणि to अपनुद्यात् 2/1        
·         उच्छोषणम् [ucchoṣaṇam] = drying up = उच्छोषण (m.) + adj. to शोकम् 2/1           
·         इन्द्रियाणाम् [indriyāṇām] = of senses = इन्द्रिय (n.) + सम्बन्धे to उच्छोषणम् 6/3          
·         अवाप्य [avāpya] = having gained = अव्ययम्
o   अव + आप् to gain + ल्यप् (having …ed)
·         भूमौ [bhūmau] = on the earth = भूमि (f.) + अधिकरणे to राज्यम् 7/1
·         असपत्नम् [asapatnam] = unrivalled = असपत्न (n.) + adj. to राज्यम् 2/1
o   अविद्यमानं (non-existant) सपत्नं (enemy) यस्य (for it) तत् असपत्नं = राज्यम् । नञ्बहुव्रीहिसमासः
·         ऋद्धम् [ṛddham] = prosperous = ऋद्ध (n.) + adj. to राज्यम् 2/1
·         राज्यम् [rājyam] = kingdom = राज्य (n.) + कर्मणि to अवाप्य 2/1
·         सुराणाम् [surāṇām] = of the denizens of heaven = सुर (m.) + सम्बन्धे to आधिपत्यम् 6/3     
·         अपि [api] = even = अव्ययम्
·         [ca] = and = अव्ययम्
·         आधिपत्यम् [ādhipatyam] = sovereignty = आधिपत्य (n.) + कर्मणि to अवाप्य 2/1


Sentence:
0 हि 0 प्रपश्यामि I/1
यत् 1/1 शोकम् 2/1 मम 6/1 इन्द्रियाणाम् 6/3 उच्छोषणम् 2/1 अपनुद्यात् III/1
असपत्नम् 2/1 ऋद्धम् 2/1 राज्यम् 2/1 भूमौ 7/1 अपि 0 0 सुराणाम् 6/3 आधिपत्यम् 2/1 अवाप्य 0 ॥२.८॥
I do not ( 0 हि 0) see (प्रपश्यामि I/1)
that (यत् 1/1) will remove (अपनुद्यात् III/1) the sorrow (शोकम् 2/1) that dries up (उच्छोषणम् 2/1) my (मम 6/1) senses (इन्द्रियाणाम् 6/3), even if I were to obtain (अवाप्य 0) an unrivalled (असपत्नम् 2/1) and prosperous (ऋद्धम् 2/1) kingdom (राज्यम् 2/1) on earth (भूमौ 7/1) and ( 0) sovereignty (आधिपत्यम् 2/1) over the denizens of heaven (सुराणाम् 6/3 अपि 0).

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