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Tuesday, August 20, 2019

6th Chapter 34th Sloka


चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्‍दृढम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥६.३४॥

cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavad-dṛḍham |
tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyoriva suduṣkaram ||6.34||

चञ्चलम् 1/1 हि 0 मनः 1/1 कृष्ण S/1 प्रमाथि 1/1 बलवत् 1/1 दृढम् 1/1
तस्य 6/1 अहम् 1/1 निग्रहम् 2/1 मन्ये I/1 वायोः 6/1 इव 0 सुदुष्करम् 2/1 ॥६.३४॥

·         चञ्चलम् [cañcalam] = agitation = चञ्चल n. + S.C. to मनः 1/1
·         हि [hi] = in fact = अव्ययम्  
·         मनः [manaḥ] = the mind = मनस् (n.) + कर्तरि to (भवति) 1/1
·         कृष्ण [kṛṣṇa] = Kṛṣṇa = कृष्ण (m.) + सम्बोधने 1/1
·         प्रमाथि [pramāthi] = tyrant = प्रमाथिन् n. + S.C. to मनः 1/1
·         बलवत् [balavat] = strong = बलवत् n. + S.C. to मनः 1/1
·         दृढम् [dṛḍham] = well-rooted = दृढ n. + S.C. to मनः 1/1
·         तस्य [tasya] = of it (the mind) = तद् n. + सम्बन्धे to निग्रहम् 6/1
·         अहम् [aham] = I = अस्मद् m. + कर्तरि to मन्ये 1/1
·         निग्रहम् [nigraham] = control = निग्रह (m.) + कर्मणि to मन्ये 2/1
·         मन्ये [manye] = think = मन् (4A) + लट्/कर्तरि/I/1
·         वायोः [vāyoḥ] = of the wind = वायु (m.) + सम्बन्धे to (निग्रहम्) 6/1
·         इव [iva] = like = अव्ययम्  
·         सुदुष्करम् [suduṣkaram] = very difficult = सुदुष्कर m. + O.C. to निग्रहम् 2/1


In fact, Kṛṣṇa! The mind is ‘agitaion’, a strong, well-rooted tyrant. I think of it as impossible to control as the wind.

Sentence 1:
In fact (हि 0), Kṛṣṇa (कृष्ण S/1)! The mind (मनः 1/1) is ‘agitaion (चञ्चलम् 1/1)’, a strong (बलवत् 1/1), well-rooted (दृढम् 1/1) tyrant (प्रमाथि 1/1). I (अहम् 1/1) think (मन्ये I/1) of it (तस्य 6/1) as impossible (सुदुष्करम् 2/1) to control (निग्रहम् 2/1) as (इव 0) the wind (वायोः 6/1).


प्रसिद्धम् 1/1 एतत् 1/1
चञ्चलम् 1/1 हि 0 मनः 1/1 कृष्ण S/1 इति 0 कृषतेः 6/1 विलेखन-अर्थस्य 6/1 रूपम् 1/1 भक्त-जन-पाप-आदि-दोष-आकर्षणात् 5/1 कृष्णः 1/1, तस्य 6/1 संबुद्धिः 1/1 हे 0 कृष्ण S/1 हि 0 यस्मात् 5/1 मनः 1/1 चञ्चलम् 1/1 0 केवलम् 1/1 अत्यर्थम् 1/1 चञ्चलम् 1/1, प्रमाथि 1/1 0 प्रमथन-शीलम् 1/1, प्रमथ्नाति III/1 शरीरम् 2/1 इन्द्रियाणि 2/3 0 विक्षिपत् 1/1 सत् 1/1 पर-वशी-करोति III/1 किञ्च 0बलवत् 1/1 प्रबलम् 1/1, 0 केनचित् 0 नियन्तुम् 0 शक्यम् 1/1, दुर्निवारत्वात् 5/1 किञ्च 0 दृढम् 1/1 तन्तु-नागवत् 0 अच्छेद्यम् 1/1 तस्य 6/1 एवंभूतस्य 6/1 मनसः 6/1 अहम् 1/1 निग्रहम् 2/1 निरोधम् 2/1 मन्ये I/1 वायोः 6/1 इव 0 यथा 0 वायोः 6/1 दुष्करः 1/1 निग्रहः 1/1 ततः 0 अपि दुष्करम् 2/1 मन्ये I/1 इति 0 अभिप्रायः I/1


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