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Sunday, April 3, 2016

5th Chapter 16th Sloka

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।
तेषामादित्यवज् ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥५.१६॥

jñānena tu tadajñānaṃ yeṣāṃ nāśitamātmanaḥ |
teṣāmādityavaj jñānaṃ prakāśayati tatparam ||5.16||

ज्ञानेन 3/1 तु 0 तत् 1/1 अज्ञानम् 1/1 येषाम् 6/3 नाशितम् 1/1 आत्मनः 6/1
तेषाम् 6/3 आदित्यवत् 0 ज्ञानम् 1/1 प्रकाशयति III/1 तत् 2/1 परम् 2/1 ॥५.१६॥


·         ज्ञानेन [jñānena] = by knowledge = ज्ञान (n.) + कर्तरि to नाशितम् 3/1
·         तु [tu] = whereas = अव्ययम्
·         तत् [tat] = that = तद् (pron. n.) + adjective to अज्ञानम् 1/1
·         अज्ञानम् [ajñānam] = ignorance = अज्ञान (n.) + कर्तरि to (भवति) 1/1
·         येषाम् [yeṣām] = of those = यद् (pron. m.) + सम्बन्धे to अज्ञानम् 6/3
·         नाशितम् [nāśitam] = destroyed = नाशित (n.) + complement to अज्ञानम् 1/1
·         आत्मनः [ātmanaḥ] = of the self = आत्मन् (m.) + सम्बन्धे to अज्ञानम् 6/1
·         तेषाम् [teṣām] = of them = तद् (pron. m.) + सम्बन्धे to ज्ञानम् 6/3
·         आदित्यवत् [ādityavat] = like the sun = अव्ययम्
·         ज्ञानम् [jñānam] = knowledge = ज्ञान (n.) + कर्तरि to प्रकाशयति 1/1
·         प्रकाशयति [prakāśayati] = reveals = प्र + काश् to shine + लट्/कर्तरि/III/1
·         तत् [tat] = that = तद् (pron. n.) + adjective to परम् 2/1
·         परम् [param] = Brahman = पर (n.) + कर्मणि to प्रकाशयति 2/1


Whereas for those whose ignorance of the self is destroyed by knowledge, the knowledge reveals (the self as) that Brahman, like the sun (reveals objects previously covered in darkness).

Sentence 1:
येषाम् 6/3 तु 0 तत् 1/1 आत्मनः 6/1 अज्ञानम् 1/1 ज्ञानेन 3/1 नाशितम् 1/1
तेषाम् 6/3 ज्ञानम् 1/1 आदित्यवत् 0 तत् 2/1 परम् 2/1 प्रकाशयति III/1 ॥५.१६॥
Whereas (तु 0) for those whose (येषाम् 6/3 तेषाम् 6/3) ignorance (तत् 1/1 अज्ञानम् 1/1) of the self (आत्मनः 6/1) is destroyed (नाशितम् 1/1) by knowledge (ज्ञानेन 3/1), the knowledge (ज्ञानम् 1/1) reveals (प्रकाशयति III/1) (the self as) that (तत् 2/1) Brahman (परम् 2/1), like the sun (आदित्यवत् 0) (reveals objects previously covered in darkness).


ज्ञानेन 3/1 तु 0 येन 3/1 अज्ञानेन 3/1 आवृताः 1/3 मुह्यन्ति III/3 जन्तवः 1/3 तत् 1/1 अज्ञानम् 1/1 येषाम् 6/3 जन्तूनाम् 6/3 विवेकज्ञानेन 3/1 आत्म-विषयेण 3/1 नाशितम् 1/1 आत्मनः 6/1 भवति III/1, तेषाम् 6/3 जन्तूनाम् 6/3 आदित्यवत् 0 यथा 0 आदित्यः 1/1 समस्तम् 2/1 रूपजातम् 2/1 अवभासयति III/1 तद्वत् 0 ज्ञानम् 1/1 ज्ञेयम् 2/1 वस्तु 2/1 सर्वम् 2/1 प्रकाशयति III/1 तत् 2/1 परम् 2/1 परमार्थतत्त्वम् 2/1


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