Tuesday, December 30, 2014

2nd Chapter 9th Sloka

सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तपः ।
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥२.९॥

sañjaya uvāca
evamuktvā hṛṣīkeśaṃ guḍākeśaḥ parantapaḥ |
na yotsya iti govindamuktvā tūṣṇīṃ babhūva ha ||2.9||

सञ्जयः 1/1 उवाच III/1
एवम् 0 उक्त्वा 0 हृषीकेशम् 2/1 गुडाकेशः 1/1 परन्तपः 1/1
0 योत्स्ये I/1 इति 0 गोविन्दम् 2/1 उक्त्वा 0 तूष्णीम् 0 बभूव III/1 0 ॥२.९॥

·         सञ्जयः [sañjayaḥ] = Sañjaya = सञ्जय (m.) + कर्तरि to उवाच 1/1         
·         उवाच [uvāca] = said = वच् (2P) to say + लिट्/कर्तरि/III/1

·         एवम् [evam] = in that manner = अव्ययम्
·         उक्त्वा [uktvā] = having said= अव्ययम्
o   वच् (2P to say) + क्त्वा (having …ed)
·         हृषीकेशम् [hṛṣīkeśam] = lord of senses (Kṛṣṇa) = हृषीकेश (m.) + कर्मणि to उक्त्वा 2/1
o   हृषीकणाम् (of senses) ईशः (lord) हृषीकेशः । षष्ठीतत्पुरुषसमासः
·         गुडाकेशः [guḍākeśaḥ] = lord of sleep (Arjuna) = गुडाकेश (m.) + कर्तरि to बभूव 1/1
o   गुडाकानाम् (of sleep) ईशः (lord) गुडाकेशः । षष्ठीतत्पुरुषसमासः
·         परन्तपः [parantapaḥ] = Vanquisher of enemies (Arjuna) = परन्तप (m.) + adj. to [अर्जुन] 1/1
o   परं तापयति इति परन्तपः ।
o   पर + अम् + तप् to heat + णिच् + खच्    3.2.39 द्विषत्परयोस्तापेः । ~ खच् ।
·         [na] = not = अव्ययम्
·         योत्स्ये [yotsye] = will not fight = युध् (4A) to fight + लृट्/कर्तरि/I/1
o   युध् + लृट्/कर्तरि/I/1
= युध् +                       तिङ्
= युध् +स्य +              3.1.33 स्यतासी लृलुटोः ।
= योध् +स्य +                         7.3.86 पुगन्तलघूपदस्य च । ~ सार्वधातुकार्धधातुकयोः गुण्
= योत् +स्य +                         8.4.55 खरि च । ~ चर् झलाम्
= योत् +स्ये                    6.1.97 अतो गुणे । ~ पररूपम् एकः पूर्वपरयोः
·         इति [iti] = thus = अव्ययम्
·         गोविन्दम् [govindam] = Govinda (Kṛṣṇa) = गोविन्द (m.) + कर्मणि to उक्त्वा 2/1
o   गोभिः (by the words) विन्यते (is gained) इति  गोविन्दः। उपपदतत्पुरुषसमासः
·         उक्त्वा [uktvā] = having said= अव्ययम्
o   वच् (2P to say) + क्त्वा (having …ed)
·         तूष्णीम् [tūṣṇīm] = silent = अव्ययम्
·         बभूव [babhūva] = has become = भू (1P) to be + लिट्/कर्तरि/III/1
·         [ha] = as it was= अव्ययम्


Sentence 1:
सञ्जयः 1/1 उवाच III/1
Sañjaya (सञ्जयः 1/1) said (उवाच III/1).

Sentence 2:
गुडाकेशः 1/1 परन्तपः 1/1 एवम् 0 हृषीकेशम् 2/1 उक्त्वा 0
0 योत्स्ये I/1 इति 0 गोविन्दम् 2/1 उक्त्वा 0 तूष्णीम् 0 बभूव III/1 0 ॥२.९॥

Having spoken (उक्त्वा 0) to Kṛṣṇa (हृषीकेशम् 2/1) in this manner (एवम् 0), Arjuna (गुडाकेशः 1/1), the scorcher of foes (परन्तपः 1/1), saying (उक्त्वा 0) to Govinda (गोविन्दम् 2/1), ‘I shall not fight ( 0 योत्स्ये I/1),’ became (बभूव III/1) silent (तूष्णीम् 0).

2nd Chapter 8th Sloka

न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद् यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् ।
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥२.८॥

na hi prapaśyāmi mamāpanudyād yacchokamucchoṣaṇamindriyāṇām |
avāpya bhūmāvasapatnamṛddhaṃ rājyaṃ surāṇāmapi cādhipatyam ||2.8||

0 हि 0 [तत् 2/1] प्रपश्यामि I/1 मम 6/1 अपनुद्यात् III/1 यत् 1/1 शोकम् 2/1 उच्छोषणम् 2/1 इन्द्रियाणाम् 6/3
अवाप्य 0 भूमौ 7/1 असपत्नम् 2/1 ऋद्धम् 2/1 राज्यम् 2/1 सुराणाम् 6/3 अपि 0 0 आधिपत्यम् 2/1 ॥२.८॥

·         [na] = not = अव्ययम्
·         हि [hi] = indeed = अव्ययम्
·         प्रपश्यामि [prapaśyāmi] = I see = प्र + दृश् (1P) to see + लट्/कर्तरि/I/1
·         मम [mama] = my = अस्मद् (pron. m.) + सम्बन्धे to इन्द्रियाणाम् 6/1    
·         अपनुद्यात् [apanudyāt] = would remove = अप + नुद् (6P) to remove + विधिलिङ्/कर्तरि/III/1
·         यत्  [yat] = this = यद्  (pron. n.) + कर्तरि to अपनुद्यात् 1/1     
·         शोकम् [śokam] = sorrow = शोक (m.) + कर्मणि to अपनुद्यात् 2/1        
·         उच्छोषणम् [ucchoṣaṇam] = drying up = उच्छोषण (m.) + adj. to शोकम् 2/1           
·         इन्द्रियाणाम् [indriyāṇām] = of senses = इन्द्रिय (n.) + सम्बन्धे to उच्छोषणम् 6/3          
·         अवाप्य [avāpya] = having gained = अव्ययम्
o   अव + आप् to gain + ल्यप् (having …ed)
·         भूमौ [bhūmau] = on the earth = भूमि (f.) + अधिकरणे to राज्यम् 7/1
·         असपत्नम् [asapatnam] = unrivalled = असपत्न (n.) + adj. to राज्यम् 2/1
o   अविद्यमानं (non-existant) सपत्नं (enemy) यस्य (for it) तत् असपत्नं = राज्यम् । नञ्बहुव्रीहिसमासः
·         ऋद्धम् [ṛddham] = prosperous = ऋद्ध (n.) + adj. to राज्यम् 2/1
·         राज्यम् [rājyam] = kingdom = राज्य (n.) + कर्मणि to अवाप्य 2/1
·         सुराणाम् [surāṇām] = of the denizens of heaven = सुर (m.) + सम्बन्धे to आधिपत्यम् 6/3     
·         अपि [api] = even = अव्ययम्
·         [ca] = and = अव्ययम्
·         आधिपत्यम् [ādhipatyam] = sovereignty = आधिपत्य (n.) + कर्मणि to अवाप्य 2/1


Sentence:
0 हि 0 प्रपश्यामि I/1
यत् 1/1 शोकम् 2/1 मम 6/1 इन्द्रियाणाम् 6/3 उच्छोषणम् 2/1 अपनुद्यात् III/1
असपत्नम् 2/1 ऋद्धम् 2/1 राज्यम् 2/1 भूमौ 7/1 अपि 0 0 सुराणाम् 6/3 आधिपत्यम् 2/1 अवाप्य 0 ॥२.८॥
I do not ( 0 हि 0) see (प्रपश्यामि I/1)
that (यत् 1/1) will remove (अपनुद्यात् III/1) the sorrow (शोकम् 2/1) that dries up (उच्छोषणम् 2/1) my (मम 6/1) senses (इन्द्रियाणाम् 6/3), even if I were to obtain (अवाप्य 0) an unrivalled (असपत्नम् 2/1) and prosperous (ऋद्धम् 2/1) kingdom (राज्यम् 2/1) on earth (भूमौ 7/1) and ( 0) sovereignty (आधिपत्यम् 2/1) over the denizens of heaven (सुराणाम् 6/3 अपि 0).


Free download of PDF files are available at Arsha Avinashi Foundation.