Monday, February 29, 2016

5th Chapter 1st Sloka



अर्जुन उवाच ।
सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि ।
यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ५.१॥

arjuna uvāca |
sannyāsaṃ karmaṇāṃ kṛṣṇa punaryogaṃ ca śaṃsasi |
yacchreya etayorekaṃ tanme brūhi suniścitam ||5.1||

अर्जुनः 1/1 उवाच III/1
सन्न्यासम् 2/1 कर्मणाम् 6/3 कृष्ण 8/1 पुनः 0 योगम् 2/1 0 शंससि II/1
यत् 1/1 श्रेयः 1/1 एतयोः 6/2 एकम् 2/1 तत् 2/1 मे 4/1 ब्रूहि II/1 सुनिश्चितम् 2/1 ५.१॥

·         अर्जुनः [arjunaḥ] = Arjuna = अर्जुन (m.) + कर्तरि to उवाच 1/1          
·         उवाच [uvāca] = said = वच् (2P) to say + लिट्/कर्तरि/III/1
·         सन्न्यासम् [sannyāsam] = renunciation = सन्न्यास (m.) + कर्मणि to शंससि 2/1
·         कर्मणाम् [karmaṇām] = of actions = कर्मन् (n.) + 6/3
·         कृष्ण [kṛṣṇa] = O Kṛṣṇa = कृष्ण (m.) + सम्बोधने + 1/1
·         पुनः [punaḥ] = again = अव्ययम्
·         योगम् [yogam] = karma-yoga = योग (m.) + कर्मणि to शंससि 2/1
·         [ca] = and = अव्ययम्
·         शंससि [śaṃsasi] = you praise = शंस् (to praise) + लट्/कर्तरि/II/1
·         यत् [yat] = that which = यद् (pron. n.) + 1/1
·         श्रेयः [śreyaḥ] = better = श्रेयस् (n.) + 1/1
·         एतयोः [etayoḥ] = of the two =तद् (pron. n.) + निर्धारणे 6/2
·         एकम् [ekam] = one= एक (pron. n.) + कर्मणि to ब्रूहि 2/1
·         तत् [tat] = that = तद् (pron. n.) + adj. to एकम् 2/1
·         मे [me] = for me = अस्मद् (pron. m.) + सम्प्रदाने 4/1
·         ब्रूहि [brūhi] = tell = ब्रूञ् (to say) + लोट्/कर्तरि/II/1
·         सुनिश्चितम् [suniścitam] = definitely = सुनिश्चित (n.) + adj. to एकम् 2/1


Arjuna said:
O Kṛṣṇa, you praise renunciation of actions and also karma-yoga. Tell me definitely which one of these two is better.

Sentence 1:
अर्जुनः 1/1 उवाच III/1
Arjuna (अर्जुनः 1/1) said (उवाच III/1):

Sentence 2:
कृष्ण 8/1 कर्मणाम् 6/3 सन्न्यासम् 2/1 पुनः 0 योगम् 2/1 0 शंससि II/1
O Kṛṣṇa (कृष्ण 8/1), you praise (शंससि II/1) renunciation (सन्न्यासम् 2/1) of actions (कर्मणाम् 6/3) and ( 0) also (पुनः 0) karma-yoga (योगम् 2/1).


Sentence 3:
यत् 1/1 एतयोः 6/2 श्रेयः 1/1 तत् 2/1 सुनिश्चितम् 2/1 एकम् 2/1 मे 4/1 ब्रूहि II/1 ५.१॥
Tell (ब्रूहि II/1) me (मे 4/1) definitely (सुनिश्चितम् 2/1) which (यत् 1/1 तत् 2/1) one (एकम् 2/1) of these two (एतयोः 6/2) is better (श्रेयः 1/1).

Friday, February 26, 2016

4th Chapter 42nd Sloka



तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥४.४२

tasmādajñānasambhūtaṃ hṛtsthaṃ jñānāsinātmanaḥ |
chittvainaṃ saṃśayaṃ yogamātiṣṭhottiṣṭha bhārata ||4.42||


तस्मात् 5/1 अज्ञानसम्भूतम् 2/1 हृत्स्थम् 2/1 ज्ञानासिना 3/1 आत्मनः 6/1
छित्त्वा 0 एनम् 2/1 संशयम् 2/1 योगम् 2/1 आतिष्ठ II/1 उत्तिष्ठ II/1 भारत 8/1 ॥४.४२


·         तस्मात् [tasmāt] = therefore = तद् (pron. n.) + हेतौ 5/1
·         अज्ञानसम्भूतम् [ajñānasambhūtam] = born of ignorance = अज्ञानसम्भूत (m.) + adj. to संशयम् 2/1
o   न (विरोधार्थे नञ्) ज्ञानम् इति अज्ञानम् ।
o   अज्ञानात् सम्भूतम् अज्ञानसम्भूतम्
·         हृत्स्थम् [hṛtstham] = rooted in the mind = हृत्स्थ (m.) + adj. to संशयम् 2/1
o   हृदि तिष्ठति इति हृत्स्थम् (UT) ।
·         ज्ञानासिना [jñānāsinā] = with the sword of knowledge = ज्ञानासि (m.) + करणे to छित्त्वा 3/1
o   ज्ञानम् एव असिः इति ज्ञानासिः (KT), तेन ।
·         आत्मनः [ātmanaḥ] = about the self = आत्मन् (m.) + सम्बन्धे 6/1
·         छित्त्वा [chittvā] = having slayed = अव्ययम्
·         एनम् [enam] = this = एतद् (pron. m.) + adj. to संशयम् 2/1
o   अन्वादेशः
·         संशयम् [saṃśayam] = doubt = संशय (m.) + कर्मणि to छित्त्वा 2/1
·         योगम् [yogam] = yoga (karma-yoga) = योग (m.) + कर्मणि to आतिष्ठ 2/1
·         आतिष्ठ [ātiṣṭha] = take to = आ + स्था to undertake + लोट्/कर्तरि/II/1
·         उत्तिष्ठ [uttiṣṭha] = stand up = उद् + स्था to undertake + लोट्/कर्तरि/II/1
·         भारत [bhārata] = O! Arjuna = भारत (m.) + सम्बोधने 1/1


Therefore, O Bhārata, slaying with the sword of knowledge this doubt about the self, which is born of ignorance, which is rooted in the mind, get up and take to yoga (karma-yoga).


Sentence 1:
भारत 8/1 तस्मात् 5/1 एनम् 2/1 अज्ञानसम्भूतम् 2/1 हृत्स्थम् 2/1 आत्मनः 6/1 संशयम् 2/1 ज्ञानासिना 3/1 छित्त्वा 0 उत्तिष्ठ II/1 योगम् 2/1 आतिष्ठ II/1 ॥४.४२
Therefore (तस्मात् 5/1), O Bhārata (भारत 8/1), slaying (छित्त्वा 0) with the sword of knowledge (ज्ञानासिना 3/1) this (एनम् 2/1) doubt (संशयम् 2/1) about the self (आत्मनः 6/1), which is born of ignorance (अज्ञानसम्भूतम् 2/1), which is rooted in the mind (हृत्स्थम् 2/1), get up (उत्तिष्ठ II/1) and take to (आतिष्ठ II/1) yoga (योगम् 2/1) (karma-yoga).


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