Showing posts with label 0205 2nd Chapter 5th Sloka. Show all posts
Showing posts with label 0205 2nd Chapter 5th Sloka. Show all posts

Sunday, December 28, 2014

2nd Chapter5th Sloka

गुरूनहत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके।
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान् ॥२.५॥

gurūnahatvā hi mahānubhāvān śreyo bhoktuṃ bhaikṣyamapīha loke|
hatvārthakāmāṃstu gurūnihaiva bhuñjīya bhogān rudhirapradigdhān ||2.5||

गुरून् 2/3 अहत्वा 0 हि 0 महानुभावान् 2/3 श्रेयः 1/1 भोक्तुम् 0 भैक्ष्यम् 2/1 अपि 0 इह 0 लोके 7/1
हत्वा 0 अर्थकामान् 2/3 तु 0 गुरून् 2/3 इह 0 एव 0 भुञ्जीय I/1 भोगान् 2/3 रुधिरप्रदिग्धान् 2/3 ॥२.५॥

·         गुरून् [gurūn] = teachers = गुरु (m.) + कर्मणि to अहत्वा 2/3  
·         अहत्वा [ahatvā] = not having killed = अव्ययम्
o   हन् to kill, injure + क्त्वा
o   न हत्वा इति अहत्वा । नञ्तत्पुरुषसामासः
·         हि [hi] = indeed= अव्ययम्
·         महानुभावान् [mahānubhāvān] = highly exalted = महानुभाव (m.) + adj. to गुरून् 2/3
o   महान्तः (great) अनुभावाः (dignitiy) इति महानुभावाः । कर्मधारयतत्पुरुषसमासः
·         श्रेयः [śreyaḥ] = better =  श्रेयस् (n.) + 1/1
o   प्रशस्य (exellent) + ईयसुँन् (comparative)
= श्र + ईयस्
= श्रेयस् (better)
·         भोक्तुम् [bhoktum] = to eat = अव्ययम्
o   भुज् (7U) to eat, enjoy + तुमुँन् (to infinitive)
o   भुज् + तुम्          3.3.10 तुमुन्ण्वुलौ क्रियायां क्रियार्थायाम् । ~ प्रत्ययः परश्च धातोः
= भोज् + तुम्      8.2.30 पुगन्तलघूपधस्य च । ~ गुणः अङ्गस्य इकः सार्वधातुकार्धधातुकयोः
= भोग् + तुम्      8.2.30 चोः कुः । ~ झलि
= भोक् + तुम्      8.4.55 खरि च । ~ झलां चर्
·         भैक्ष्यम् [bhaikṣyam] = food collected from others = भैक्ष्य (n.) + कर्मणि to भोक्तुम् 2/1
·         अपि [api] = even= अव्ययम्
·         इह [iha] = here= अव्ययम्
o   इदम् (this) + ह (7th case)         5.3.11 इदमो हः । ~  सप्तम्याः
= इ + ह                                               5.3.3 इदम इश् ।
= इह
·         लोके [loke] = in this world = लोक (m.) + अधिकरणे 7/1
·         हत्वा [hatvā] = having killed = अव्ययम्
o   हन् to kill, injure + क्त्वा
·         अर्थकामान् [arthakāmān] = security and pleasure = अर्थकाम (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3
·         तु [tu] = wheras= अव्ययम्
·         गुरून् [gurūn] = teachers = गुरु (m.) + कर्मणि to हत्वा 2/3
·         इह [iha] = here= अव्ययम्
·         एव [eva] = indeed= अव्ययम्
·         भुञ्जीय [bhuñjīya] = I would experience = भुज् (7U) to enjoy + विधिलिङ्/कर्तरि/I/1
·         भोगान् [bhogān] = enjoyments = भोग (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3
·         रुधिरप्रदिग्धान् [rudhirapradigdhān] = stained by blood = रुधिरप्रदिग्धान् (m.) + कर्मणि to भुञ्जीय 2/3


Sentence 1:
महानुभावान् 2/3 गुरून् 2/3 अहत्वा 0 हि 0  
इह 0 लोके 7/1 भैक्ष्यम् 2/1 अपि 0 भोक्तुम् 0 श्रेयः 1/1 [स्यात् III/1]
It would be ([स्यात् III/1]) better (श्रेयः 1/1) to eat (भोक्तुम् 0) even (अपि 0) the food collected from others (भैक्ष्यम् 2/1) here (इह 0) in this world (लोके 7/1) after not killing (अहत्वा 0) highly exalted (महानुभावान् 2/3) teachers (गुरून् 2/3).

Sentence 2:
गुरून् 2/3 हत्वा 0
इह 0 एव 0 रुधिरप्रदिग्धान् 2/3 अर्थकामान् 2/3 भोगान् 2/3 भुञ्जीय I/1 ॥२.५॥

Having killed (हत्वा 0) the teachers (गुरून् 2/3), I would experience (भुञ्जीय I/1) enjoyments (भोगान् 2/3), which are securites and pleasures (अर्थकामान् 2/3), and which are stained with blood (रुधिरप्रदिग्धान् 2/3). 
Medha Michika's books on Sanskrit Grammar are available at: Amazon in your country.

Free download of PDF files are available at Arsha Avinashi Foundation.