वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥५॥
vasudevasutaṃ devaṃ kaṃsacāṇūramardanam |
devakīparamānandaṃ kṛṣṇaṃ vande jagadgurum ||5||
वसुदेवसुतम् 2/1 देवम् 2/1 कंसचाणूरमर्दनम् 2/1 ।
देवकीपरमानन्दम् 2/1 कृष्णम् 2/1 वन्दे I/1 जगद्गुरुम् 2/1 ॥५॥
· वसुदेवसुतम् [vasudevasutam] = son of Vasudeva = वसुदेवसुत (m.) + adj. to कृष्णम् 2/1
o वसुदेवस्य सुतः पुत्रः वसुदेवसुतः (6T)।
· देवम् [devam] = the Lord = देव (m.) + adj. to कृष्णम् 2/1
· कंसचाणूरमर्दनम् [kaṃsacāṇūramardanam] = destroyer of Kaṃsa and Cāṇūra = कंसचाणूरमर्दन (m.) + adj. to कृष्णम् 2/1
o कंसश्च चाणूरश्च कंसचाणूरौ (ID) तयोः मर्दनः कंसचाणूरमर्दनः (6T) ।
· देवकीपरमानन्दम् [devakīparamānandam] = greatest joy of Devakī. = देवकीपरमानन्द (m.) + adj. to कृष्णम् 2/1
o परमश्च असौ आदन्तश्च परमानन्दः (KT) । देवक्याः परमानन्दः देवकीपरमानन्दः (6T)।
· कृष्णम् [kṛṣṇam] = Kṛṣṇa = कृष्ण (m.) + कर्मणि to वेन्दे 2/1
· वन्दे [vande] = I salute = वन्द् (1A) to salute + लट्/कर्तरि/I/1
· जगद्गुरुम् [jagadgurum] = the teacher of the world = जतद्गुरु (m.) + adj. to कृष्णम् 2/1
o जगतः गुरुः जगद्गुरुः (6T) ।
I salute Kṛṣṇa, the Lord, the teacher of the world, son of Vasudeva, destroyer of Kaṃsa and Cāṇūra, the greatest joy of Devakī.
Sentence 1:
वसुदेवसुतम् 2/1 कंसचाणूरमर्दनम् 2/1 देवकीपरमानन्दम् 2/1 जगद्गुरुम् 2/1 कृष्णम् 2/1 देवम् 2/1 वेन्दे I/1 ॥५॥
I salute (वेन्दे I/1) Kṛṣṇa (कृष्णम् 2/1), the Lord (देवम् 2/1), the teacher of the world (जगद्गुरुम् 2/1), son of Vasudeva (वसुदेवसुतम् 2/1), destroyer of Kaṃsa and Cāṇūra (कंसचाणूरमर्दनम् 2/1) the greatest joy of Devakī (देवकीपरमानन्दम् 2/1).